प्रसिद्ध ग्राम के क़िस्से : पागल लंगूर (1)



क्या वो ठीक है ? क्या उसे डर नहीं लगता ? माना कि उनसे हमको कुछ खाने को मिल जाता है । फिर भी उनके इतने पास नहीं जाना चाहिए। पता नहीं कब कोई हमला कर दे । तुम भी कभी कभी ऐसा करते हो। मेरी नहीं सुनते। उसका तो क्या है। ना बीवी है ना बच्चे। वो तो कर सकता है कुछ भी, पर तुम मेरी सुना करो वरना कुछ भी हो सकता है.....

ये बातचीत एक लंगूर और लंगूरनी के बीच की है । लंगूर सुन रहा है और लंगूरनी बोल रही है । दोनो प्रसिद्ध ग्राम के आश्रम चौराहे के कोने मे बैठे हैं और दूर से एक और लंगूर को देख रहे हैं जो की बीच चौराहे पर लोगों की भीड़ के बीच बैठा है ।

प्रसिद्ध ग्राम उत्तर भारत का विश्वप्रसिद्ध लेकिन एक  छोटा सा क़स्बा है । उत्तरी हिमालय के पहाड़ों की मैदानी सीमा पर बसा प्रसिद्ध ग्राम  एक पर्यटक स्थान भी है । इस स्थान के पूर्व मे पहाड़ी जंगल एवं पश्चिम मे मैदानी शहर बसा हुआ है । और बीचो बीच गंगा नदी बह रही है । जंगल  नज़दीक होने की वजह से बंदरो और लंगूरो का आना  यहाँ के लिए आम बात है । चलो अब कहानी मे वापस चलते हैं...

दोनो लंगूर कोने पर बैठे बातें कर ही रहे थे तभी एक इंसान लोहे का सरिया लिए बीच चौराहे पर बैठे लंगूर की तरफ़ बढ़ता है  और ज़ोर से घुमा कर उस लंगूर के मारता है । वो सरिया सीधे जा कर लंगूर के सर पर लगता है और लंगूर वहीं सड़क पर पसर जाता है ।

मर गया क्या... क्यों मारा तुमने इसको.. बेज़ुबान जानवर को मारते हो.. पाप लगेगा तुम्हें.. अरे इसको किसी पशु चिकित्सालय मे लेके जाओ .. देखो तो साँस चल रही है के नहीं ...

चौराहे  की भीड़ उस इंसान को कोसने लगती है । लंगूर बीच सड़क पर गिरा हुआ है और भीड़ ने चारों तरफ़ से उसे घेरा हुआ है । कोई कुछ तो कोई कुछ कह रहा है । लेकिन हर कोई हाथ लगाने को डर रहा है ।

थोड़ी देर पहले इस लंगूर ने उस इंसान की आम की ठेली ने से दो आम चुरा कर खा लिए थे । उस इंसान ने अपने दो आमो का बदला के लिया था पर अब उसे डर लग रहा था कहीं उसने लंगूर को मार तो नहीं दिया। भीड़ भी उसी को कोस रही थी और उसका पूरा ध्यान सरिया छुपाने मे लगा हुआ था ।

इतने मे लंगूर की आँखे खुलती हैं । उसके सर पर दर्द हो रहा है । शायद खून भी निकल रहा है । उसको समझ मे नहीं आया की उस इंसान ने उसको क्यों मारा । लेकिन अब वो 20-25 इंसानो से घिरा हुआ था । उसने देखा की सबने हाथों मे  कुछ ना कुछ पकड़ा हुआ है सब चिल्ला रहे हैं और उसे मारने वाले है । वह अपनी पूरी ताक़त से चीखता है। सारे इंसान एकदम से उसके पास से दूर हो जाते हैं। उसको भागने का रास्ता दिखता है। वह एक छलांग लगता है और अपनी पूरी ताक़त से भागने लगता है। सभी लोग उसके भागने की गति से चकित हैं । उन्होंने इतना तेज भागता हुआ लंगूर पहली बार देखा। लंगूर को भागते हुए जो भी इंसान दिखायी देता इसे लगता की उस इंसान के हाथ मे कुछ है और वो इंसान उसे मारना चाहता है और वो और ताक़त से भागता है। भागते भागते जंगल नज़दीक आ जाता है ।

प्रसिद्ध ग्राम एक तरफ़ जंगल से घिरा है । जंगली जानवर इंसानो के इलाक़े मे ना आए इसलिए जंगल की सीमा पर एक ऊँची दीवार बनायी गयी है । बस कही कही पर संकरे रास्ते छोड़ रखे हैं अंदर जंगल मे जाने के लिए। लंगूर को भी जंगल मे जाने के लिए वही संकरा रास्ता पार करना है। भागते भागते लंगूर दीवार के नज़दीक पहुँच जाता है । वह देखता है की वह रास्ते पर एक इंसान खड़ा है । वह अब रुकना नहीं चाहता था । रास्ता बंद था । इंसान वहाँ पर रास्ता रोके खड़ा है । शायद वो भी उसे मारना चाहता है । उसने ना रुकने का मन बनाया और एक छलांग लगा कर कूद पड़ा उस इंसान के ऊपर । और दूसरी छलांग पर जंगल के अंदर । उसके मन ने दर्द भरी राहत की साँस ली । गति थोड़ी धीरे हुई । उसने पीछे मुड़ कर देखा । वो इंसान ज़मीन पर पड़ा है । उसके नाक और सर से खून बह रहा है। वह लंगूर की तरफ़ इशारा करके कुछ कह रहा है । वहाँ 2-4 लोग और जमा हो गए है।

लंगूर फिर से दौड़ने की गति को तेज करता है और पेड़ों की तरफ़ बढ़ जाता है.....

दूसरा भाग यहाँ पढ़ें...

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