आखिरी बात ..... एक कविता ....




आखिरी बात है , तू सुन तो जरा
दिल की फरियाद है , तू सुन तो जरा

लपटें जो थी उठी प्रीत की दिल मे,
आज बुझने को है ,
तू सुन तो जरा..

साथ चलते थे मिलकर जिन राहों में
आज वीरान हैं ,
तू सुन तो जरा...


रातें जो गुजरी थी , तेरी बाहों में
अब वो ढलने को है
 तू सुन तो जरा...


कसमें वादों से थी जुड़ी जो कड़ी
आज टूटने को है ,
तू सुन तो जरा...


हँसने की अब तुझे वजह मिल गयी
फिर भी नम क्यों आंखे हैं
तू सुन तो जरा...


सिमटने हैं लगी अब मेरी धड़कने
आखिरी सांस है ,
तू सुन तो जरा.....


©®Deepak Nautiyal..

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