खिड़की वाली ::भाग 3 :: अंतिम ।

                   

                        खिड़की वाली :: भाग 3

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.... जेसे ही वह गेट के बाहर निकला तो सामने ही एक बड़े से पेड़ की छावं के नीचे बने बैंच पर हरे सूट सलवार में एक लड़की जो कि अपने दोनों हाथों से अपने चेहरे को सहारा देकर बैठी हुई थी ... अनिल पहले तो वहीँ थोड़ी दूर रुक कर उसको पहचानने की कोशिश करने लगा ..लेकिन नहीं पहचान पाया ...... फिर वह उसके पास गया और बड़े विन्रम होकर उस से पूछा..... आपने मुझे बुलाया था क्या किसी बच्चे से बोल के.?......  यह सुनते ही उस लड़की ने अनिल की और देखा और धीरे से मुस्कुराते हुए बोली ... कैसे हो अनिल.?..... अनिल ने उसे अभी तक नहीं पहचाना था ...और उसके मुह से अपना नाम सुनकर उसे थोडा आश्चर्य तो हुवा ,लेकिन अपनी शंका दूर करने के लिए आखिर उसने हिम्मत जुटा कर पूछ ही लिया...... सॉरी मैंने आपको पहचाना नहीं ,,आप मुझे केसे जानती हो.....??? अनिल की यह बात सुनकर वह लड़की धीरे से हंसी और थोडा हैरान होके बोली.... सच में तुमने मुझे नहीं पहचाना क्या ??????  अनिल की उसे जानने की उत्सुकता और अधिक बढ़ रही थी ..... लेकिन पूछने की हिम्मत नहीं हो रही थी दुबारा से..... आखिर सामने बैठी लड़की ने खड़े होकर कहा ... अरे मैं डिंपल हूँ ..भूल गए क्या .... यह सुनते ही जेसे की अनिल के चेहरे से हवाइयां उड़ने लगी .. पैरों तले जमीन खिसकने लगी...एसा लगा की 440 वोल्ट का झटका लग गया हो...... खैर एसा तो होना ही था ,,क्यूँ की जिसकी ही माला अनिल दिन रात जपता रहता था .. ख्वाबो ख्यालों में जिसका ही चेहरा हरदम रहता था और जिसकी एक झलक पाने को न जाने कब से बेकरार था .. आज वो उसके बिलकुल सामने खड़ी थी ..बदन पे हरा लिबास ,आँखों में हल्का काजल , चेहरे पे गजब का चमक , बालों की एक लट उसके चेहरे पे हवा से लहरा रही थी , कुल मिलकर बहुत सुंदर थी वह .... इस तरह अचानक अपने सामने देख उसे कुछ देर तो अनिल उसके चेहरे की तरफ देखता रहा लेकिन फिर अचानक से अपनी नजर झुका ली और बहुत हिम्मत करते हुए लडखडाती आवाज में बोला .....अरे डिंपल आप....?? केसे आये आप यहाँ ...मतलब बिना बताये .....आपको पता केसे चला मेरे घर का ????.....  तभी तपाक से डिंपल ने कहा ... क्यों.. आ नहीं सकती क्या .....  अनिल ने कहा .. अरे एसी बात नहीं है आप आ सकती हो ..लेकिन मेरे घर का पता केसे चला आपको ??  डिंपल मुस्कुराते हुए लेकिन बनावटी गुस्से में बोली  ... अरे भूल गए क्या ? एक दिन आपने ही तो बताया था अपने घर का पता मुझे ..वो भी पिन कोड सहित ...भूल गए क्या ?......   यह सुनकर अनिल को याद आया की उसी ने तो एक बार भावनावों में बहकर डिंपल को अपना पता बताया था ,,,लेकिन तब उसे ये नहीं पता था की एसा भी होगा एक दिन... अनिल समझ नहीं पा रहा था कि क्या करें क्या न करें .....  अनिल इसी सोच में डूबा हुवा था , इसी बीच डिंपल ने कहा ... आप अगर बीजी न हों अभी तो क्या हम थोडा घुमने चले कहीं ????   डिंपल की यह बात सुनकर अनिल थोडा हिचकिचाया और सोचने लगा की अगर मुझे किसी ने यहाँ किसी लड़की के साथ घूमते हुए देख लिया और घर में मुखबरी कर दी तो उसके बाद उसका जबरदस्त कुटान होना निश्चित था .... अनिल धर्मसंकट में फंस गया था ,, एक तरफ डिंपल ,जिसके सपने वो हरपल ही देखा करता था , और दूसरी तरफ घर में कुटाई का डर ....
लेकिन डिंपल के थोडा जोर देने के बाद अनिल तयार हो गया घुमने के लिए ,और वहां से चल पढ़ा........................
पूरे रास्ते भर अनिल को कोई भी उसकी पहचान का मिलता तो अनिल झट से अपना सर नीचे कर देता इस डर से की कहीं उसे कोई पहचान न ले ... थोड़ी देर चलने के बाद जब अनिल डिंपल के साथ अपने घर की रेंज से बहार निकल गया तो उसे थोडा सुकून मिला , क्यूँ की अब यहाँ उसके पहचान वालों के मिलने की उम्मीद कम ही थी ....
पूरे रास्ते भर अनिल ने शायद ही कोई बात की होगी डिंपल से ..उसे समझ ही नहीं आ रहा था की आखिर बात करे भी तो क्या ...और वेसे भी जब आदमी के अंदर घबराहट होती है तो उसे कुछ सूझता ही नहीं है... यहि हाल अनिल का भी था ....वो डर के कारण उस सुखद पल को एहसास ही नहीं कर पा रहा था ...
कुछ देर चलने के बाद वहीँ पास में ही एक नदी के किनारे वो दोनों बैठ गए ....वेसे अनिल की नजर कब से डिंपल के उस मोबाइल पर थी जिस से वह उसे कॉल किया करती थी.... शायद सिल्वर कलर का नोकिया 3310..... कुछ देर बाद अनिल ने हिचकते हुवे डिंपल से उसका मोबाइल देखने के लिए माँगा , और फिर उसने देखा की  उसके डिस्प्ले पर उसका नाम लिखा हुवा था .जिसे देखकर वह बहुत खुश हुवा और साथ में ये भी जानने की इच्छा हुई की आखिर मोबाइल के डिस्प्ले में नाम कैसे लिखा जाता है....   वेसे दोनों बात कम करते और शांत ज्यादा थे और एक दुसरे से नजर यदा कदा ही मिला पा रहे थे ....
फिर अचानक डिंपल वहां से खडी हुई और कहा .... शायद काफी देर हो चुकी है अब हमे चलना चाहिए....  अनिल ने भी इस बात पर हामी भरी और दोनों वहां से वापिस जाने लगे ... कुछ देर साथ चलने के बाद डिंपल को आधे रास्ते तक छोड़ने के बाद अनिल वापिस अपने घर आ गया..  और थोड़ी देर आराम करने के बाद वह यह सोचने लगा की बस किसी ने मुझे रास्ते में देख न लिया हो और घर में पता न चल जाए ....और वह शाम का इन्तजार करने लगा ..लेकिन सब कुछ सामान्य रहा ..कोई मुखबरी नहीं हुई थी अनिल की उसके घर में ... इसीलिए अनिल राहत में था .... 
अब उसके अंदर से डर लगभग निकल चुका था और वह खाना खा के बिस्तर पर लेट गया और पूरे दिन के घटनाक्रम को याद करने लगा ... अब तो उसने डिंपल को देख लिया था इसलिए अब उसे कोई भी काल्पनिक तस्वीर बनाने की कोई जरुरत नहीं हुई....  और इस बात का जिक्र अनिल ने गलती से अपने कुछ दोस्तों से भी कर दिया जो की आगे आने वाले समय में उसके लिए सही साबित नहीं होने वाला था .... उसके वो दोस्त भी अनिल से जिद करते हुए कहने लगे थे ......अरे अनिल यार जिसके साथ तू प्यार करता है उसकी शक्ल हमें भी तो दिखा दे एक बार ,, आखिर हम भी तो देखें की वो दिखती कैसी है ??.......  इन  शब्दों के पीछे उसके दोस्तों की शरारत छुपी हुई नजर आ रही थी कोई .......  लेकिन अनिल कुछ न समझते हुवे उनसे वादा कर बैठा गलती से की वो जरुर डिंपल को उनको दिखायेगा .. लेकिन दूर से ......
कुछ दिनों बाद जब कॉलेज खुले तो अनिल पहले से ही डिंपल से फ़ोन पर ही मिलने का वादा कर चुका था ... अनिल और अनिल के वो शरारती दोस्त जिनके बहकावे में अनिल आ गया था वो भी कॉलेज पहुंचे.. अनिल के कहने पर उसके दोस्त एक छुपाव वाली जगह पर बैठ गए ..और अनिल उस जगह चला गया जहाँ डिंपल उस से मिलने को आने वाली थी ...
थोडा इंतजार करने के बाद जब डिंपल वहां आई ..तो उसे अनिल और उसके दोस्तों की चाल की कोई भी भनक नहीं थी ..वह तो केवल अनिल से ही मिलने आई थी बस..... अनिल को भी कहीं न कहीं यह लग रहा था की उसने कहीं अपने दोस्तों को बता कर कोई गलती तो नहीं कर दी ....  कुछ देर बात करने के बाद जब डिंपल वहां से अपनी क्लास की और जाने लगी तो तुरंत उसके दोस्त जो की छुप के सब नजारा देख रहे थे अनिल के पास आये और जोर जोर से हंसने लगे और उसका मजाक उड़ाते हुवे कहने लगे ..... अबे साले इस पुरे कॉलेज में तुझे ये ही मिली थी क्या ...तू भी सच में बहुत बड़ा बेवकूफ है .. एसा कहते हुवे जोर से हंसने लगे और हंसते हुवे वहां से चलते बने ....   अनिल थोडा उदास हो गया था इस सब से .. ...उसे समझ नहीं आ रहा था की आखिर उसके दोस्त उसका इतना मजाक क्यूँ उड़ा रहे थे डिंपल की लेकर........  कॉलेज खत्म होने के बाद अनिल घर जाने के बजाय सीधे अपने दोस्त के घर गया जिसने कॉलेज में उसका मजाक उड़ाया था ये जानने के लिए की आखिर उन्होंने एसा किया क्यूँ था ....
जब अनिल उसी दोस्त के घर पहुंचा और उस से कॉलेज में उसके द्वारा किये गए घटिया व्यवहार के बारे में पूछने लगा तो ..उसका दोस्त फिर से जोर जोर से हंसने लगा और डिंपल की सूरत को लेके मजाक उड़ाने लगा , जो की अनिल को बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था , उसे अंदर ही अंदर से गुस्सा भी बहुत आ रहा था लेकिन वह क्या करता बचपन का दोस्त जो था  ....
वहां से बिना कोई बहस कर अनिल अपने घर आ गया , उसके दिमाग में अपने दोस्त की बातें गूंज रही थी लगातार जेसे कि.. अबे उसकी शक्ल तो देख केसी है .. तू कैसे उसके चक्कर में फंस गया .. अब कहीं न कहीं भी अनिल का मन भी दोराहे में जाने लगा ,, एक तरफ वो डिंपल के बारे में सोचता और दूसरी तरफ अपने दोस्तों के द्वारा उडाये गए मजाक का ...
लेकिन बात ये समझ नहीं आ रही थी की आखिर उसके दोस्तों ने क्यों एसा मजाक बनाया था उसका .... शायद एसा भी हो सकता है की वो अनिल से जल रहे हों ... की इसकी कैसे गर्ल फ्रेंड बन गयी , ये तो बेवकूफ जैसा दिखता है कुछ इस तरह की भावना उनके मन में आ रही हो .... वेसे भी हर एक दोस्त कमीना तो होता ही है .....
लेकिन अब अनिल को ये चिंता सताने लगी थी की उसके दोस्त हर बार उसका डिंपल को लेके मजाक उड़ाया करेंगे... और वह बिलकुल एसा नहीं चाहता था .... बहुत सोचने के बाद उसने अनजाने एक में मुर्खता भरा निर्णय लिया ..की वह अब डिंपल से कभी बात नहीं करेगा और उसे अनदेखा करेगा ..... ताकि वह दोस्तों के बीच हंसी का पात्र बनने से बच जाए.... उसे ये सब सोचते हुवे बहुत ख़राब भी लग रहा था ... कहाँ वह डिंपल की ही माला जपता था रात दिन  अब उसे न चाहते हुवे डिंपल को खुद से दूर करना पड रहा था, सिर्फ और सिर्फ वो भी उन कमीनों दोस्तों की वजह से ...,....
 फिर उसके बहुत दिनों तक अनिल ने डिंपल को कोई भी फोन नहीं किया ..और  डिंपल के किसी भी कॉल को लेने से मना करता रहा ... टेलीफोन बूथ वाला लड़का कई बार अनिल को डिंपल के फ़ोन के लिए बताने के लिए आया लेकिन हर बार अनिल कोई न कोई बहाना बना कर बात नहीं करता था ... कॉलेज में भी एसा ही चलता रहा जब भी डिंपल अनिल को दिखती तो वह अपना रास्ता बदल देता था और डिंपल के किसी भी बात का जवाब न देते हुवे उसे अनदेखा करते हुवे चला जाता था .. वेसे अनिल को दिल ही दिल में ये सब करते हुवे बहुत ख़राब भी लग रहा था ..... लेकिन वह उस कमीने दोस्तों की बातों में जो आ गया था ,,इसीलिए जानबूझ कर ऐसी हरकत कर रहा था ....
कुछ दिनों तक यही सब चलता रहा , अनिल ने पूरी तरह से डिंपल को खुद से दूर कर दिया वो भी अपनी बचकाना हरकतों की वजह से ....
फिर कुछ महीनो तक डिंपल उसे कॉलेज में नजर आना बंद हो गयी .... क्यूँ की शायद अब डिंपल ने उसकी क्लास की तरफ आना बंद कर दिया था ..आखिर कोई कितनी जिल्लत सह सकता था ... क्यूँ की बार बार अनिल के सबके सामने डिंपल को अनदेखा करने से उसकी सहेलियां भी उसका मजाक उड़ाने लगी थी ... ये सब डिंपल को अच्छा नहीं लगता था ...
इस बात को कई दिन बीत चुके थे ,फिर एक दिन वो हुवा जिसने अनिल को अपनी हरकतों के लिए पछताने में मजबूर कर दिया ....  कॉलेज के गेट के बहार अनिल और डिंपल का अचानक आमना सामना हुवा .. अनिल ने डिंपल की तरफ देखा और धीरे से मुस्कुराया ...और सोचा की डिंपल उससे फिर से बात करने की कोशिश करेगी ... लेकिन अनिल का घमंड वहीँ औंधे मुह धडाम से गिरा ... डिंपल ने उसे देखा तक नहीं और उसे अनदेखा कर के वहां से चली गयी .....लेकिन अनिल फिर भी वहां खड़े होकर डिंपल के पलटने का इन्तजार करने लगा ,,उसे पूरा यकीन था की वह पलट के जरुर देखेगी.... लेकिन इन्तजार करते करते  अनिल की आखें पथरा गयी लेकिन डिंपल ने पीछे मुड के नहीं देखा और कुछ देर में वह उसकी आँखों से ओझल हो गयी....
वह पलटती भी क्यूँ.......? आखिर अनिल ने उसका प्यार भरा दिल जो तोडा था वो भी बिना उसकी किसी गलती के सिर्फ दूसरों की बातों में आकर ,,,,,,अनिल को इस बात से बहुत बड़ा धक्का लगा ...उसे अपने किये पर बहुत पछतावा होने लगा था ...वह वहीँ एक किनारे लगे बैंच पर बैठ गया और खुद को कोसने लगा ...उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था .....  उसकी आँखों में पछतावे के आंसू साफ़ दिख रहे थे .. लेकिन वह अब कर भी क्या सकता था .....उसे ये अंदाजा लग गया था की किसी भी इंसान की कमी उसके जाने के बाद हि महसूस होती है..... उस दिन के बाद डिंपल ने फिर अनिल को कभी भी पीछे मुड नहीं देखा और न ही कभी उस से बात की........ अनिल के पास खाली हाथ पछताने के सिवा और कुछ भी न था ........

तो दोस्तों ये थी  अनिल और डिंपल की दास्तान   जो की एक खिड़की से शुरू हुई थी और एक अनिल के मुर्खता भरे फैसले से हमेसा की वजह से  खत्म हो गयी ...... उम्मीद है की आपको जरुर पसंद आई होगी ... 
इस कहानी के पिछले भाग 1 और 2 आपको इसी पेज में मिलेंगे.... धन्यवाद ...

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