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असली ख़ुशी

सत्य घटना पर आधारित असली ख़ुशी वातावरण बहुत ही शोर गुल भरा लेकिन मन मोहक था , और अपनी और सबका ध्यान आकर्षित करने वाला था ..चारों तरफ लोगों की भीड़ का रेला उस बड़े से मैदान के अंदर इधर से उधर और फिर उधर से इधर मंडरा रहा था .. किशोर युवा युवतियों की तादात कुछ ज्यादा नजर आ   रही थी .. जिनमे कुछ जोड़े में , जो की बहुत खुश और संतुष्ट प्रतीत हो रहे थे और कुछ अकेले ही अपनी किस्मत को कोसे हुए इधर से उधर जोगियों की भाँती विचरण कर रहे थे....| कुछ लोगों ने   अपने छोटे बच्चों के हाथ इस कारण से पकडे हुये थी की कहीं ये चिल्लर अगर खो गए भीड़ में तो सारा का सारा   मजा धरा रह जायेगा.... लोगों की इस भीड़ के बीच में जहाँ पर भी खाली जगह मौजूद थी वो जगह चरखियों जिनमे की कुछ बड़ी चरखियां और कुछ छोटी , कुछ जनरेटर द्वारा चालू थी तो कुछ के लिए उस चरखे वाले के बल की जरुरत पड रही थी. और अस्थाई दुकानों ने घेर रखी थी,.   जो की टेंट और बांस की बल्लियों या फिर टीन की चादरों   से निर्मित थी..... कुछ दुकाने कपड़ों लत्तों से भरी हुई थी तो कुछ खाने पीने की चीजों से जिन्हें की लोगों ने म...

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